उत्तराखंड के नंदादेवी नेशनल पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक रिपोर्ट में अहम कमियां सामने आई हैं। जैव विविधता की निगरानी के लिए किए गए अध्ययन में फ्रंटलाइन वनकर्मियों की कमी और लंबी दूरी की गश्त घटने का उल्लेख किया गया है।
नंदादेवी नेशनल पार्क की सुरक्षा व्यवस्था सवालों में है। यहां पर फ्रंट लाइन फील्ड स्टाफ की बेहद कमी है। इसके अलावा प्रतिबंध के कारण लंबी दूरी की गश्तों की संख्या में कमी आई है। यह खुलासा नंदादेवी दशकीय जैव विविधता अनुश्रवण अभियान रिपोर्ट-2006 में हुआ है।
नंदादेवी नेशनल पार्क में हर दस साल में जैव विविधता की निगरानी के लिए अभियान दल को भेजा जाता है। इसमें भारतीय वन्यजीव संस्थान समेत अन्य संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होते हैं। इस बार यह दल जून में भेजा गया था। इस दल के अध्ययन के बाद जो रिपोर्ट तैयार हुई है, उसको हाल में जारी किया गया है। रिपोर्ट में जैव विविधता से जुड़ी जानकारी देने के साथ कई कमियों का उल्लेख करने के साथ सुझाव भी दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभियान के दौरान फ्रंट लाइन स्टाफ (वन रक्षक, वन दरोगा, डिप्टी रेंजर, रेंजर आते हैं) की कमी देखी गई है।इसमें कहा गया है कि चुनौतियों और बड़ा क्षेत्र होने के कारण मानव संसाधन को बढ़ाने की जरूरत है, जो कि प्रभावी सुरक्षा और गश्त के लिए जरूरी है। यहां पर लंबी दूरी की गश्त में कमी आई है, जिससे क्षेत्र में कम होती उपस्थिति के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश और अवैध गतिविधियों की आशंका बढ़ सकती है। ऐसे में पार्क में नियमित लंबी दूरी की गश्त को मजबूत किया जाए। रिपोर्ट में कर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित करने को भी कहा गया है। इसके अलावा बिठारतोली से रामणी तक नियमित स्मार्ट पेट्रोलिंग और कैमरा ट्रैप आदि की संख्या को बढ़ाने को भी कहा गया है।
नंदादेवी परिदृश्य नाजुक, इनर सेंक्चुरी पर्यटन का दबाव सहने में नहीं होगी सक्षम
रिपोर्ट में कहा गया है कि नंदादेवी परिदृश्य की अत्यंत संवेदनशील व नाजुक प्रकृति को देखते हुए इनर सेंक्चुरी किसी भी प्रकार का पर्यटन का दबाव सहन करने में सक्षम नहीं होगी। ऐसे में वर्तमान नीति के अनुसार इको टूरिज्म को डिबरूगेटा तक सीमित रखते हुए पार्क प्रबंधन की निकट निगरानी को जारी रखा जाए। डिबरूगेटा तक भी इको टूरिज्म की अनुमति वर्ष-2007 में दी गई थी। ऐसे में भविष्य में यहां पर इको टूरिज्म के विस्तार की संभावना तलाशने को लेकर रिपोर्ट में हरी झंडी नहीं मिली है। हालांकि स्थानीय स्तर पर अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए एकीकृत समुदाय सह प्रबंधन लागू किए जाने पर विचार करने का सुझाव दिया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कैमरा ट्रैप जैसे आधुनिक संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा कर्मियों की संख्या बढ़ाने को लेकर भी कार्य किया जाएगा। इस रिपोर्ट को शासन को सौंपा जाएगा। शासन स्तर से अग्रेतर कार्यवाही की जाएगी। – नीना ग्रेवाल, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव