अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव रुकवाने का श्रेय लिया है। उन्होंने एक जनसभा में कहा कि उन्होंने भारी टैरिफ लगाने की धमकी देकर दोनों देशों को पीछे हटने पर मजबूर किया, लेकिन इस प्रयास के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला।
अमेरिका में मध्यावधी चुनाव की सरगर्मी के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी रैलियों में भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए सैन्य टकराव का मुद्दा फिर उठने लगा है। फ्लोरिडा में शुक्रवार को आयोजित एक रैली में ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारी टैरिफ लगाने की धमकी देकर दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच लड़ाई रुकवाई थी। इस दौरान उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर भी निराशा जताई।
टैरिफ की धमकी देकर युद्ध रुकवाने का दावा
ट्रंप ने रैली में कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। दोनों देश एक-दूसरे से नाराज थे और लगातार गोलीबारी हो रही थी। ऐसे में उन्होंने दोनों देशों को चेतावनी दी कि अगर लड़ाई जारी रही तो अमेरिका उनके सामान पर 250 फीसदी तक टैरिफ लगा देगा। इससे दोनों देशों के लिए अमेरिका के साथ कारोबार करना मुश्किल हो जाता। ट्रंप के मुताबिक, उनकी इस धमकी के बाद भारत और पाकिस्तान ने गोलीबारी रोक दी और संघर्ष समाप्त हो गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस दौरान 11 विमान मार गिराए गए थे। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में इस संख्या के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी।
नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने का मलाल
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने कई युद्धों को खत्म कराने में भूमिका निभाई है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने आठ युद्ध सुलझाए हैं और यह उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने के लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से कोई मदद नहीं ली। ट्रंप के मुताबिक, उन्हें राष्ट्रपति पद की दौड़ में उतरते समय अंदाजा नहीं था कि दुनिया में इतने सारे युद्ध चल रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा था तनाव
भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस हमले में कई लोगों की जान गई थी। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के बाद 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।
