पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में 15 साल बाद तृणमूल कांग्रेस को सत्ता खोनी पड़ी है। राज्य के नौ जिलों में पार्टी का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया। भाजपा ने इन जिलों में मतदाताओं को साधने के लिए क्या रणनीति अपनाई थी, टीएमसी की हार की वजहें क्या हैं,
पश्चिम बंगाल के 23 जिलों में से 9 जिलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का पूरी तरह सफाया कर दिया और इन क्षेत्रों की सभी 68 सीटों पर जीत हासिल की। इसी के साथ भाजपा ने इस बड़े चुनाव में राज्य को पूरी तरह अपने रंग में रंग दिया। राज्य में पहली बार सत्ता में आने वाली भाजपा के लिए इन नौ जिलों का जनादेश यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार में जो कहा था कि टीएमसी कई जिलों में खाता नहीं खोल पाएगी, वह सही साबित हुआ।
भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया। वहीं, 15 साल से सत्ता में रही टीएमसी करीब 80 सीटों पर सिमट गई। इस नतीजे के साथ भाजपा ने पूर्वी भारत के अपने आखिरी बड़े गढ़ को भी जीत लिया और ‘अंग, बंग और कलिंग’ यानी बिहार, बंगाल और ओडिशा में अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
