Supreme Court: आरक्षित उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में जाने की अनुमति, बशर्ते नियम इजाजत दें

सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में स्थानांतरण का रास्ता खोल दिया है। अदालत ने कहा कि यदि भर्ती नियम अनुमति दें और उम्मीदवार के अंक पर्याप्त हों, तो उन्हें ओपन कैटेगरी में शामिल किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरक्षित वर्ग के ऐसे उम्मीदवार, जिसने परीक्षा में कोई छूट या रियायत ली हो, का ओपन(सामान्य) कैटेगरी में जाना भर्ती नियमों या रोज़गार अधिसूचना पर निर्भर करता है। यह टिप्पणी करते हुए जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 14 फरवरी 2025 के फैसले को रद्द कर दिया। साथ ही अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वे उन आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में शामिल करें, जिन्होंने ओपन कैटेगरी के अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक अंक हासिल किए हैं।

यह मामला शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा था। जिसमें जिला परिषद, नगर निगम और अन्य संस्थानों में नियुक्तियां होनी थीं। इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था कि जिन उम्मीदवारों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) में छूट का लाभ लिया है, वे सामान्य वर्ग में स्थानांतरण का दावा नहीं कर सकते। हाईकोर्ट का कहना था कि ऐसा करने से उन्हें दोहरा लाभ मिल जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि पात्रता परीक्षा में दी गई छूट सिर्फ उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा में बैठने का अवसर देने के लिए होती है। इससे उनकी मेरिट पर कोई असर नहीं पड़ता।

मूल्यांकन समान आधार पर इसलिए मौका
अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्य परीक्षा, यानी टीएआईटी में सभी उम्मीदवारों का मूल्यांकन समान आधार पर किया गया है। इसलिए यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बेहतर प्रदर्शन करता है और उसके अंक सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से अधिक हैं, तो उसे ओपन कैटेगरी में शामिल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि ओपन कैटेगरी किसी एक वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होती बल्कि यह पूरी तरह योग्यता पर आधारित होती है। अगर भर्ती नियमों में स्थानांतरण पर कोई रोक नहीं है तो इसे अनुमति दी जानी चाहिए।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *