राम मंदिर चढ़ावा मामले में चंपत राय की भूमिका को लेकर अंतिम निर्णय अब एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर निर्भर माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट में उनकी वापसी को लेकर सहमति बनती नहीं दिख रही, जबकि विश्व हिंदू परिषद में उनका वर्तमान पद बनाए रखने पर विचार है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के पुनर्गठन पर भी मंथन जारी है और इस विषय पर विभिन्न स्तरों पर चर्चा हो रही है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में चंपत राय की वापसी अब मुश्किल है, मगर विश्व हिंदू परिषद में उनका अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद बरकरार रहेगा। उनके भविष्य पर अंतिम फैसला एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही होगा। हालांकि, पहले इस्तीफा न देने पर अड़े चंपत अब ट्रस्ट में वापसी के लिए जोर लगा रहे हैं।
केंद्र सरकार विवाद पर स्थायी विराम के लिए ट्रस्ट के पुनर्गठन की पक्षधर है। विहिप की इच्छा थी, ट्रस्ट को चंपत राय की जगह बजरंग लाल बागड़ा संभालें। आमराय के अभाव में कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया। यूपी में चंद महीने बाद चुनाव हैं, ऐसे में केंद्र मंदिर मामले में कोई खतरा नहीं उठाना चाहती। खासतौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय चाहता है कि ट्रस्ट का पुनर्गठन हो, जिससे सकारात्मक संदेश दिया जा सके।
चंपत राय की भावी भूमिका पर विहिप में भी मतभेद हैं। विहिप व संघ ने शुरू में ही सलाह दी थी कि चंपत नैतिक आधार पर ट्रस्ट छोड़ दें। विहिप की उत्तराखंड बैठक में भी उन्हें यही सलाह दी गई। न मानने पर संघ व प्रधानमंत्री कार्यालय ने सख्ती बरती। इसके बाद अयोध्या में होने वाली केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक चंपत की अनुपस्थिति में दिल्ली में बुलाई गई। विहिप के एक धड़े का मानना है, स्थिति स्पष्ट होने तक संगठन को चंपत से पूर्ण दूरी बनानी चाहिए।wte8
उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी मामले में मुझ पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, पर मैंने मौन धारण कर लिया है। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद हर सवाल व आरोप का जवाब दूंगा। मेरा 45 वर्षों का सार्वजनिक जीवन खुली किताब की तरह है। अंततः सत्य की ही जीत होगी।
