महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व से जनवरी 2026 में छोड़ी गई पांच वर्षीय मादा भारतीय गिद्ध ने 3,334 किलोमीटर की यात्रा कर राजस्थान के रणथंभोर टाइगर रिजर्व तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया।
महाराष्ट्र के मेलघाट से एक बंदी-प्रजनन वाले भारतीय गिद्ध ने राज्यों को पार करते हुए आश्चर्यजनक रूप से 3,334 किलोमीटर की दूरी तय की है। यह राजस्थान के रणथंभोर टाइगर रिजर्व तक पहुंचा है। यह जानकारी वन्यजीव विशेषज्ञों ने बुधवार को दी।
बीएनएचएस के निदेशक ने क्या बताया?
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के निदेशक किशोर रिठे ने कहा कि यह पक्षी जंगल में बिना किसी पूरक भोजन के जीवित रहा, जो बंदी अवस्था में पाले गए गिद्धों की प्राकृतिक वातावरण में अनुकूलन करने, स्वतंत्र रूप से भोजन का पता लगाने और लंबी दूरी की यात्रा करने की क्षमता को दर्शाता है।
गिद्ध संरक्षण कार्यक्रम के लिए अहम
उन्होंने एक बयान में कहा कि यह उपलब्धि गिद्ध संरक्षण कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो भारत में गिद्धों की आबादी को पुनर्जीवित करने में मदद करने के लिए बंदी-प्रजनित रिलीज पहलों की क्षमता को उजागर करती है। उन्होंने बताया कि अपनी लंबी यात्रा के दौरान, पक्षी ने पचमढ़ी के पास सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और मध्य प्रदेश में कुनो राष्ट्रीय उद्यान का भी दौरा किया, जो देश का चीता पुनर्प्रवेश स्थल है। वहीं, मंगलवार को रणथंबोर टाइगर रिजर्व पहुंचा।
लंबी चोंच वाला गिद्ध (जिप्स इंडिकस), जिसका नाम X67 है। एक पांच वर्षीय मादा है। यह 15 बंदी-प्रजनित गिद्धों में से एक थी, जिन्हें सौर ऊर्जा से चलने वाले ट्रैकिंग टैग लगाए गए थे। वहीं, 2 जनवरी को मेलघाट टाइगर रिजर्व के अकोट वन्यजीव प्रभाग के सोमथाना रेंज से छोड़ा गया था। अधिकारी ने बताया कि इसके बाद यह लगभग चार महीने तक छोड़े जाने वाले स्थान के आसपास ही भोजन की तलाश में घूमता रहा और धीरे-धीरे प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल ढल गया।
3,334 किलोमीटर की दूरी तय की
बीएनएचएस के एक बयान में कहा गया है ‘पक्षी 28 मई को मेलघाट टाइगर रिजर्व से निकला और मध्य भारत में एक लंबी यात्रा पर निकल पड़ा। इसने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से होते हुए अंततः रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान तक का सफर तय किया, कुल मिलाकर 3,334 किलोमीटर की दूरी तय की।’ इसमें कहा गया है कि 27 दिनों की अवधि में, इसने रणथंबोर पहुंचने से पहले सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल क्षेत्र और कुनो राष्ट्रीय उद्यान में अस्थायी विश्राम किया।
रिथे ने कहा ‘सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि यह इशारा करता है कि गिद्ध बाघ अभ्यारण्य और संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क को पसंद करते हैं क्योंकि मांसाहारी जीवों की अच्छी उपस्थिति के कारण जंगली शव अभी भी उपलब्ध हैं। मेलघाट से छोड़े गए सभी 15 गिद्धों के पैरों में नीले रंग के छल्ले लगाए गए थे जिन पर पहचान संख्या अंकित थी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि नीला रंग दर्शाता है कि छल्ले भारत में लगाए गए थे। वहीं, अक्षर “M” महाराष्ट्र को छोड़ने का स्थान दर्शाता है। इसमें आगे कहा गया है कि ये टैग सौर ऊर्जा से संचालित होते हैं और वैज्ञानिकों को जंगली में छोड़े जाने के बाद गिद्धों की गतिविधि, यात्रा दूरी, सुरक्षा और जीवित रहने की संभावना पर नजर रखने में मदद करते हैं।