भविष्य के युद्धों में लड़ाई जमीन, समुद्र और आसमान से आगे बढ़कर अंतरिक्ष तक पहुंच सकती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार साइबर, लेजर और इलेक्ट्रॉनिक हमलों से दुश्मन के उपग्रहों को निशाना बनाया जा सकता है।
युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब लड़ाई केवल जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अंतरिक्ष भी संभावित युद्ध क्षेत्र बनता जा रहा है। पृथ्वी की कक्षा में मौजूद संचार, नेविगेशन और सैन्य उपग्रह किसी भी आधुनिक देश की रणनीतिक ताकत हैं।
इस हमले का उद्देश्य विरोधी पक्ष की संचार व्यवस्था को बाधित करना था। विशेषज्ञों के अनुसार, आज उपग्रहों को निशाना बनाने के लिए जामिंग, फर्जी सिग्नल भेजना, नियंत्रण प्रणाली में सेंध लगाना और लेजर किरणों से सेंसरों को निष्क्रिय करने जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
मिसाइल हमले से बढ़ेगा अंतरिक्ष कचरे का संकट
उपग्रहों को मार गिराने वाली मिसाइलों का कई देश सफल परीक्षण कर चुके हैं। हालांकि ऐसे हमलों से अंतरिक्ष में हजारों मलबे के टुकड़े फैल जाते हैं। यह मलबा अन्य उपग्रहों से टकराकर श्रृंखलाबद्ध दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है, जिससे भविष्य में नए उपग्रह प्रक्षेपण और अंतरिक्ष अभियानों पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
उपग्रहों को मार गिराने वाली मिसाइलों का कई देश सफल परीक्षण कर चुके हैं। हालांकि ऐसे हमलों से अंतरिक्ष में हजारों मलबे के टुकड़े फैल जाते हैं। यह मलबा अन्य उपग्रहों से टकराकर श्रृंखलाबद्ध दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है, जिससे भविष्य में नए उपग्रह प्रक्षेपण और अंतरिक्ष अभियानों पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
