अल्मोड़ा में तीन जिंदगियां पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की भेंट चढ़ गईं। तीन दिन तक परिवार भटकता रहा, लेकिन जुड़वा बच्चे और मां नहीं बचे। करीब एक वर्ष पहले ही निशा की शादी मनोज से हुई थी जो आर्थिक रूप से कमजोर था।
पहाड़ों के कठिन जीवन व बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की भेंट इस बार एक गर्भवती चढ़ी है। इनोलू गांव की गर्भवती निशा को बचाने की कोशिश में उसका परिवार तीन दिन तक रामनगर से हल्द्वानी और काशीपुर तक अस्पतालों के चक्कर काटता रहा। कहीं इलाज की उम्मीद जगी तो कहीं इंतजार मिला।
यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि पहाड़ और आसपास के क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद उन खामियों पर भी बड़ा सवाल है, जिनकी कीमत मरीजों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।
