अमेरिकी विशेष दूत जेरेड कुशनर ने कहा कि गाजा के मुद्दे पर इस्राइल और अमेरिका अंतिम लक्ष्य पर सहमत हैं, लेकिन घरेलू राजनीति के कारण नेतन्याहू सरकार का रवैया थोड़ा तर्कहीन हो गया है। वहीं, अमेरिका हमास के हथियार हटाने और इस्राइली सेना की वापसी वाली शांति योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिकी विशेष दूत और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने रविवार को कहा कि इस्राइल में होने वाले नेसेट चुनाव की वजह से गाजा के हालात को लेकर प्रधानमंत्री बेंजिामिन नेतन्याहू सरकार का रवैया थोड़ा तर्कहीन हो गया है। इस बीच, वॉशिंगटन हमास और इलाके के दूसरे हथियारबंद गुटों से हथियार हटाने की योजना को आगे बढ़ाने की कोशिशें जारी रखे हुए है।
गाजा के हालात पर बात करते हुए कुशनर ने कहा कि वॉशिंगटन और इस्राइल मोटे तौर पर इस बात पर सहमत हैं कि वे क्या नतीजा चाहते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि इस्राइल में 27 अक्टूबर को होने वाले नेसेट चुनाव से पहले घरेलू राजनीतिक वजहों से यह मामला उलझ रहा है।
कुशनर ने कहा, ‘हम इस्राइल में कुछ राजनीतिक मुद्दों पर काम कर रहे हैं। मुझे लगता है कि अंतिम स्थिति को लेकर हम उनसे सहमत हैं। वहां अभी-अभी एक चुनाव हुआ है। इस वजह से कुछ मामलों में उनका व्यवहार थोड़ा अतार्किक हो गया है।’
क्या है पूरा मामला?
उनके ये बयान तब आए हैं जब इस्राइल ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के उस प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें गाजा में हमास और दूसरे हथियारबंद गुटों के हथियार हटाने की बात कही गई है। यह एक बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसमें उस इलाके से इस्राइल सेना की वापसी भी शामिल होगी। अमेरिका इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इस्राइल के विरोध की वजह से यह प्रक्रिया रुकी हुई है।
दरअसल, कुशनर, जो गाजा को लेकर अमेरिकी कूटनीतिक कोशिशों में शामिल रहे हैं, उन्होंने वहां के हालात के बारे में निराशाजनक बात कही। उन्होंने कहा, ‘गाजा में बहुत लंबे समय से हालात ठीक नहीं रहे हैं। इसे असल में एनजीओ और आतंकवादियों ने बनाया था। यह लंबे समय से एक बहुत बुरी जगह बन गया है।’
ये बातें ऐसे समय में कही गईं जब गाजा पर इस्राइल के हमले जारी हैं। युद्ध के बाद की व्यवस्थाओं, खासकर हमास के हथियारों और इस्राइली सेना की वापसी के दायरे को लेकर मतभेद बने हुए हैं। शांति योजना में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के हथियार हटाने की प्रक्रिया को इस्राइली सेना की वापसी से जोड़ने की कोशिश की गई है, लेकिन इस प्रस्ताव को राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इस्राइल ऐसी किसी भी व्यवस्था के सुरक्षा संबंधी नतीजों पर विचार कर रहा है।
