रिपोर्ट के अनुसार, 280 करोड़ से अधिक लोगों के पास पर्याप्त आवास नहीं, 380 करोड़ सामाजिक सुरक्षा से वंचित, अमीरों के पास वैश्विक संपत्ति का करीब 75 फीसदी हिस्सा है।
दुनिया में संपत्ति बढ़ रही है, लेकिन करोड़ों लोगों के जीवन में बुनियादी जरूरतें अब भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। वैश्विक गरीबी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 82.6 करोड़ से अधिक लोग प्रतिदिन तीन डॉलर से कम पर गुजारा करने को मजबूर हैं। करीब 280 करोड़ लोगों के पास सुरक्षित, सुलभ और पर्याप्त आवास नहीं है, जबकि लगभग 380 करोड़ लोग बीमारी, बेरोजगारी और वृद्धावस्था जैसी परिस्थितियों में सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं। गरीबी की इस तस्वीर को वैश्विक संपत्ति-वितरण के आंकड़ों के साथ देखें तो असमानता का अंतर और स्पष्ट हो जाता है। वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब की रिपोर्टों से जुड़े आंकड़ों के अनुसार दुनिया की सबसे अमीर 10 फीसदी आबादी के पास करीब 75 फीसदी संपत्ति है, जबकि निचली आधी आबादी के हिस्से में महज दो फीसदी संपत्ति आती है।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन रोजगार, मजदूरी, कामकाजी गरीबी और सामाजिक सुरक्षा के आंकड़ों पर नजर रखता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2025 में करीब 28.4 करोड़ कामगार अत्यंत गरीबी में जीवन बिता रहे थे। यह रोजगार प्राप्त लोगों का लगभग 7.9 फीसदी था। इससे पता चलता है कि केवल काम मिल जाना गरीबी से बाहर निकलने की गारंटी नहीं है। कम मजदूरी, अनियमित रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का अभाव परिवारों को आर्थिक संकट के प्रति असुरक्षित बनाए रखता है।गरीबी उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता भी अहम है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक गरीबी उन्मूलन से संबंधित अनुदान आधारित आधिकारिक विकास सहायता 2023 से 2024 के बीच 8.7 फीसदी घटी। यदि इस गिरावट की पुष्टि संबंधित सहायता श्रेणी के मूल आंकड़ों से होती है, तो यह उन देशों के लिए चिंता बढ़ाती है जो स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए बाहरी मदद पर निर्भर हैं।
संपत्ति बढ़ी, लेकिन राहत किसे मिली
स्विट्जरलैंड के वित्तीय सेवा समूह यूबीएस की वैश्विक संपत्ति रिपोर्ट के अनुसार 2025 में वैश्विक व्यक्तिगत संपत्ति में 10.8 फीसदी की वृद्धि हुई और अमेरिकी डॉलर के करोड़पतियों की संख्या करीब 5.75 करोड़ तक पहुंच गई। लेकिन संपत्ति में वृद्धि अपने आप यह सुनिश्चित नहीं करती कि गरीबों की आय और जीवन स्तर में भी उसी अनुपात में सुधार हो। यही अंतर वैश्विक असमानता की सबसे बड़ी चुनौती है।असमानता का असर पर्यावरणीय संकट में भी दिखाई देता है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक निजी पूंजी से जुड़े कार्बन उत्सर्जन में सबसे अमीर 10 फीसदी लोगों की हिस्सेदारी करीब 77 फीसदी, जबकि सबसे गरीब 50 फीसदी आबादी की हिस्सेदारी लगभग तीन फीसदी है।
गरीबी और अमीरी की खाई : एक नजर में
- 82.6 करोड़ से अधिक लोग दुनिया में प्रतिदिन तीन डॉलर से कम पर गुजारा करने को मजबूर।
- 280 करोड़ से अधिक लोग सुरक्षित और पर्याप्त आवास की कमी से जूझ रहे हैं।
- 380 करोड़ लोग बीमारी, बेरोजगारी और बुढ़ापे में सामाजिक सुरक्षा से वंचित।
- 2 फीसदी संपत्ति दुनिया की निचली आधी आबादी के पास शीर्ष 10 फीसदी के पास करीब 75 फीसदी।
- 10 फीसदी से भी कम आय दुनिया की निचली आधी आबादी को मिलती है, जबकि शीर्ष 10 फीसदी की हिस्सेदारी आधे से अधिक है।
- 28.4 करोड़ कामगार वर्ष 2025 में अत्यंत गरीबी में जीवन बिता रहे थे।
- भारत में शीर्ष 1 फीसदी के पास करीब 40 फीसदी संपत्ति, जबकि शीर्ष 10 फीसदी के पास लगभग 65 फीसदी।
- 8.7 फीसदी गिरावट गरीबी उन्मूलन से संबंधित अनुदान आधारित आधिकारिक विकास सहायता में 2023 से 2024 के बीच।
