दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कानून व्यवस्था संभालने के लिए दिल्ली में अर्धसैनिक बलों की 45 कंपनियां तैनात की गई हैं। सुरक्षा बढ़ने के साथ कई इलाकों में सख्ती भी बढ़ा दी गई है।
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और विभिन्न राजनीतिक दलों के विरोध-प्रदर्शनों के मद्देनजर केंद्र सरकार अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। दिल्ली पुलिस की मांग पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों की 45 कंपनियों को तैनात करने की मंजूरी दे दी है। ये सभी 45 कंपनियां फिलहाल 27 जुलाई तक दिल्ली में तैनात रहेंगी।
सीएपीएफ की इन कंपनियों से कहा गया है कि वे सभी प्रकार के अत्याधुनिक दंगा रोधी उपकरणों, ओपी स्केल आर्म्स व गोला बारूद से लैस रहें। सीआरपीएफ 24, आरएएफ 15, बीएसएफ 3, आईटीबीपी 1 और एसएसबी की 2 कंपनियां दिल्ली में पहुंच चुकी हैं। इनमें से तीस कंपनियों को भेजने के आदेश पहले ही जारी हो गए थे। कानून व्यवस्था की समीक्षा के बाद अतिरिक्त कंपनियों को दिल्ली बुलाया गया है।
केंद्रीय बलों में सीआरपीएफ और आरएएफ की सबसे ज्यादा तैनाती की गई है। इनकी 39 कंपनियों को तैनात किया गया है।
ये कंपनियां दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर कानून व्यवस्था की स्थिति को संभालेंगी। जिस तरह से प्रदर्शन में हिंसक घटनाएं हो रही हैं, उसके चलते सरकार ने साफ कर दिया है कि अब विरोध प्रदर्शन करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। कानून व्यवस्था के चलते नई दिल्ली में गुरुवार को 16 मेट्रो स्टेशन भी अस्थायी तौर से बंद कर दिए गए हैं। ये मेट्रो स्टेशन बुधवार को भी बंद किए गए थे।
नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन चल रहा है। पिछले तीन दिन में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें देखने को मिली हैं। वाहनों में तोड़फोड़ के अलावा पत्थरबाजी की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। बुधवार को सीआरपीएफ की 9 कंपनियां छत्तीसगढ़, तीन कंपनियां झारखंड, पांच मध्य प्रदेश और एक कंपनी ओडिशा से बुलाई गई है। इसी तरह आरएएफ के पश्चिम सेक्टर से चार कंपनियों को दिल्ली के लिए रवाना किया गया था। दक्षिण सेक्टर से भी आरएएफ की दो कंपनियां दिल्ली बुलाई गई हैं।
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