उत्तराखंड में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) की स्थापना की लंबे समय से चली आ रही मांग अब एक मजबूत जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। राज्य में NLU के अभाव के कारण कानून के इच्छुक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा के लिए अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता है।
आज इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, देहरादून स्थित Law Prep Tutorial द्वारा उत्तराखंड में NLU की स्थापना की मांग को लेकर एक याचिका हेतु हस्ताक्षर अभियान सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस अभियान में कानून के छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी की, जिससे इस मांग के प्रति व्यापक समर्थन देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान Law Prep Tutorial, देहरादून के निदेशक एस. एन. उपाध्याय ने आंदोलन की रूपरेखा को संबंधित अधिकारियों और प्रतिभागियों के सामने विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने स्वयं भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करते हुए छात्रों और क्षेत्रीय समुदाय की मांगों का पूर्ण समर्थन किया।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष अनूप चौहान तथा लिस्काबाद के ग्राम प्रधान अनिल कुमार भी उपस्थित रहे। उन्होंने राज्य में NLU की स्थापना के समर्थन में अपनी मजबूत सहमति व्यक्त की। यह वही स्थान है जहां पहले से NLU का प्रस्ताव रखा जा चुका है और इसकी आधारशिला पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा रखी गई थी।
विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने उत्तराखंड में NLU स्थापित होने के कई महत्वपूर्ण लाभों को रेखांकित किया:
राज्य में उच्च गुणवत्ता वाली विधि शिक्षा तक पहुंच बढ़ेगी।
आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
क्षेत्र में विधिक जागरूकता और संस्थागत विकास को बढ़ावा मिलेगा।
स्थानीय छात्रों को राज्य आरक्षण नीति का लाभ मिलेगा, जिससे उनके प्रवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी और अन्य राज्यों में जाने की आवश्यकता कम होगी।
छात्रों ने जोर देकर कहा कि NLU की स्थापना से स्थानीय प्रतिभा को सशक्त बनाया जा सकेगा और उत्तराखंड राष्ट्रीय स्तर पर विधि शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
लगातार बढ़ती जनभागीदारी और इस तरह के संगठित प्रयासों के चलते यह मांग अब और मजबूत होती जा रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर कितनी शीघ्रता से प्रतिक्रिया देती है और उत्तराखंड के पहले NLU की स्थापना की दिशा में ठोस कदम उठाती है।
उत्तराखंड में NLU की मांग ने पकड़ी रफ्तार,
