UPSC Prelims Analysis: ‘बहुत कम जा सकती है यूपीएससी प्रीलिम्स की कट-ऑफ, अलग था पेपर’, एक्सपर्ट्स ने सब बताया

 यूपीएससी प्रीलिम्स एग्जाम खत्म होने के बाद, पेपर के डिफिकल्टी लेवल को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि पेपर काफी लंबा था और आयोग ने क्वेश्चन पेपर में पुराने तरीके के ऑप्शनल को जगह दी है।

UPSC CSE Prelims Exam 2026 Analysis: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (UPSC CSE) 2026 24 मई को आयोजित किया गया। हर साल की तरह इस साल भी लाखों उम्मीदवारों ने IAS, IPS, IFS जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए यूपीएससी सीएसई प्रीलिम्स एग्जाम दिया। एग्जाम खत्म होने के बाद सबसे पहला सवाल यही आता है कि यूपीएससी का पेपर कैस गया? इसे लेकर एक्सपर्ट्स की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

काफी लंबा था पेपर, कम जा सकती है कट-ऑफ

ऑथर और PMF IAS के फाउंडर मंजुनाथ थम्मिनीदी ने यूपीएससी सिविल सेवा प्रीलिम्स एग्जाम को सबसे अलग और लंबा बताया है। उन्होंने कहा कि UPSC CSE Prelims 2026 का GS पेपर, शायद अब तक के सबसे अलग तरह के पेपर्स में से एक था। यह पेपर बहुत लंबा था, जिसमें बड़ी संख्या में सवाल ऐसे करंट अफेयर्स के विषयों से पूछे गए थे जो देखने में बिल्कुल रैंडम लग रहे थे, इस वजह से उम्मीदवारों के लिए इसका नतीजा बहुत ही अप्रत्याशित हो गया। इस साल कटऑफ काफी कम जाने की संभावना है।

जैसे आयोग पुराने पैटर्न पर लौट आया हो

उन्होंने आगे कहा कि विकल्पों (options) में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। ऐसा लगता है कि UPSC अपने पुराने तरीके से ऑप्शन बनाने के तरीके पर लौट आया है, और उस हालिया पैटर्न से हट गया है जिससे उम्मीदवार अब तक परिचित हो चुके थे। इस बदलाव ने कुछ सवालों में विकल्पों को हटाने (elimination) की प्रक्रिया को आसान बना दिया।

उन्होंने कहा कि UPSC CSE पहले से ही इस बात के लिए जाना जाता है कि यह उम्मीदवार की जवानी के कई साल मांग लेता है, और इस तरह का पेपर उनके तनाव और कठिनाइयों को और भी बढ़ा देता है। इस पेपर की सबसे बड़ी आलोचना यह है कि इसमें इस बात की स्पष्टता का अभाव है कि UPSC असल में उम्मीदवारों से क्या चाहता है। कई जरूरी क्षेत्रों को नजरअंदाज करके गैर-जरूरी लगने वाले विषयों को जरूरत से ज्यादा महत्व देकर, इस पेपर ने परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता को और भी बढ़ा दिया है।

उनका मानना है कि UPSC को अपनी प्राथमिकताओं को सही ढंग से तय करना चाहिए। इसका उद्देश्य सिविल सेवाओं के लिए सबसे जरूरी उम्मीदवारों का चयन करना होना चाहिए, न कि ज्यादा अनिश्चितता का माहौल पैदा करना। इस तरह के पेपर्स से यह खतरा बना रहता है कि योग्य और प्रतिभाशाली उम्मीदवार ‘ऑल इंडिया सर्विसेज’ में शामिल होने से हतोत्साहित हो सकते हैं, जिससे भारत का वह ‘स्टील फ्रेम’ (प्रशासनिक ढांचा) ही कमजोर पड़ सकता है।

NEXT IAS के CMD बी. सिंह का भी यूपीएससी प्रीलिम्स को लेकर यही मानना है कि UPSC CSE Prelims 2026 का पेपर अपरंपरागत लगा, जिसमें विभिन्न विषयों में कई नए और विकसित हो रहे एग्जाम पैटर्न थे। क्वेश्चन पेपर पिछले वर्षों की तुलना में काफी लंबा था, जिसके लिए बेहतर टाइम मैनेजमेंट और कॉम्प्रिहेंशन स्किल्स की जरूरत थी। ओवरऑल डिफिकल्टी लेवल भी 2025 की Prelims परीक्षा की तुलना में अधिक लगा।

वहींशुभ्रा रंजन IAS Study (SRIAS) की फाउंडर और लेखक शुभ्रा रंजन का कहना है कि यूपीएससी प्रीलिम्स का काफी अच्छा पेपर आया है। उन्होंने कहा कि यह टफेस्ट एग्जाम के रूप में जाना जाता है। अगर इससे कम स्टैंडर्ड के क्वेश्चन आते तो डिसएपॉइंटमेंट हो सकती थी। डिस्ट्रीब्यूशन में देखा जाए तो हिस्टरी का डिस्ट्रीब्यूशन अधिक है, करेंट अफेयर्स है लेकिन करेंट अफेयर्स में जो चीजें पूछी गई हैं वो तो एक्स्पेक्टड ही हैं। जो बच्चे पढ़ते हैं और अच्छे से पढ़ते हैं वह हमेशा अच्छा करते हैं।

अनंतम IAS के डायरेक्टर राहुल पुरी ने कहा कि एग्जाम का पैटर्न काफी हद तक बदल गया है। जिस तरह से प्रश्न बनाए गए हैं, उनका डिजाइन उम्मीदवार के वैचारिक ज्ञान (conceptual knowledge) को परखने के लिए है। ऑप्शनंस में भी बदलाव आया है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *