पश्चिम एशिया तनाव का असर: भारत में बोतलबंद पानी महंगा होने की आशंका, आपूर्ति बाधित होने से उद्योग पर दबाव

क्या इस बार भीषण गर्मी में प्यास बुझाना महंगा पड़ेगा? पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बोतलबंद पानी की कीमतों पर संकट खड़ा कर दिया है।

भारत में जहां एक ओर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की चेतावनी है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में अमेरिका– इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति बाधित होने से देश का लगभग 6 अरब डॉलर का बोतलबंद पानी उद्योग दबाव में है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है।

भारत में अप्रैल और मई के महीनों में पानी और ठंडे पेय पदार्थों की मांग चरम पर होती है। ऐसे समय में साफ पेयजल की कमी, भूजल प्रदूषण और बुनियादी ढांचे की खामियों के कारण बड़ी आबादी बोतलबंद पानी पर निर्भर रहती है। डेटा फॉर इंडिया के अध्ययन के अनुसार शहरी क्षेत्रों के लगभग 15% और ग्रामीण क्षेत्रों के 6% परिवार पीने के लिए पैकेज्ड पानी का उपयोग करते हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है

पूरे पैकेजिंग उद्योग पर असर की आशंका
केमको प्लास्टिक इंडस्ट्रीज के निदेशक वैभव सराओगी का कहना है कि पीईटी प्रीफॉर्म की कीमतों में वृद्धि का असर केवल बोतलबंद पानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पैकेजिंग उद्योग को प्रभावित करेगा। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों के लिए लंबे समय तक लागत को खुद वहन करना संभव नहीं होगा। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और आपूर्ति बाधित रहती है तो आने वाले हफ्तों में बोतलबंद पानी सहित अन्य पेय पदार्थों की कीमतों में वृद्धि तय मानी जा रही है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

महाराष्ट्र में 20% इकाइयों में उत्पादन बंद
महाराष्ट्र बोतलबंद पानी निर्माता संघ के अध्यक्ष विजय सिंह दुब्बल के अनुसार पीईटी प्रीफॉर्म जिनसे प्लास्टिक बोतलें बनाई जाती हैं, उनकी कीमत 115 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर लगभग 180 रुपये हो गई है और बाजार में इनकी कमी भी देखी जा रही है। कच्चे माल की बढ़ती लागत और आपूर्ति संकट के कारण महाराष्ट्र में लगभग 20% बोतल निर्माण इकाइयों ने अस्थायी रूप से संचालन बंद कर दिया है।

भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इस दबाव को सीधे महसूस कर रहा है। बोतलबंद पानी की कीमतों पर सबसे बड़ा असर प्लास्टिक पैकेजिंग की लागत बढ़ने से पड़ रहा है। कच्चे तेल से बनने वाले पीईटी (पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट) रेजिन की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है।

 

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