नाना पाटेकर: कैसे विश्वनाथ से नाना बने अभिनेता, मात्र 750 रुपये में की थी शादी; पढ़ें किस्से

Nana Patekar Death: गुरुवार 8 अक्तूबर की सुबह नाना पाटेकर के फैंस के लिए बुरी खबर लेकर आई। अल सुबह 5:20 बजे अभिनेता का निधन हो गया। वह 75 साल के थे और आखिरी बार इसी साल रिलीज हुई फिल्म ‘सूबेदार’ में नजर आए थे। यहां पढ़ें नाना के जीवन से जुड़े खास किस्से।

गोवा के मणिपाल अस्पताल में अभिनेता नाना पाटेकर को सुबह 5:20 बजे मेडिकल टीम ने मृत घोषित किया। उन्हें गंभीर सीने में दर्द की शिकायत के बाद मेडिकल टीम को उनके फ्लैट पर भेजा गया था, जहां वे बेहोशी की हालत में मिले। मौके पर उन्हें कार्डियक मसाज दिया गया और अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल में मेडिकल टीम ने उन्हें सुबह 5:20 बजे मृत घोषित कर दिया। मामला मेडिको-लीगल केस होने के कारण आज पोस्टमार्टम किया जाएगा।

यहां जानें अभिनेता के जीवन से जुड़े कुछ खास किस्से…

विश्वनाथ से नाना बनने का सफर
उनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर है। बचपन में उनकी एक छोटी बहन उन्हें प्यार से ‘नाना’ कहकर बुलाती थी, और बाद में यही नाम उनकी पहचान बन गया। उनके पासपोर्ट और आधार कार्ड पर भी ‘नाना पाटेकर’ ही दर्ज है।

सिर्फ 750 रुपये में हुई थी शादी 
साल 1978 में उन्होंने थिएटर कलाकार नीलकांती पाटेकर से शादी की थी। उस समय उनकी शादी का कुल खर्च सिर्फ 750 रुपये आया था। शादी के शुरुआती दिनों में नीलकांती एक बैंक में अधिकारी थीं और उनकी सैलरी 2500 रुपये महीना हुआ करती थी, जबकि नाना को तब एक शो के लिए मात्र 50 रुपये मिलते थे।

13 साल की उम्र में फिल्मी पोस्टर पेंट करके कमाए पैसे
नाना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद उन्होंने करीब 13 साल की उम्र में काम शुरू किया। स्कूल के बाद वे लगभग 8 किलोमीटर पैदल चलकर चुनाभट्टी जाते थे और फिल्मी पोस्टर पेंट करते थे। इसके बदले उन्हें 35 रुपये महीने और दिन में एक वक्त का खाना मिलता था। नाना ने कहा कि उस दौर की भूख और बेइज्जती ने उन्हें जिंदगी और अभिनय के बारे में बहुत कुछ सिखाया।

सेना से गहरा लगाव और ‘प्रहार’ फिल्म की ट्रेनिंग 
साल 1991 में आई अपनी फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ का निर्देशन करने और उसमें फौजी का किरदार निभाने के लिए नाना पाटेकर ने भारतीय सेना के साथ कड़ा सैन्य प्रशिक्षण (Army Training) लिया था। वे असल जिंदगी में भी सेना और जवानों का बहुत सम्मान करते हैं।

बड़े बेटे के जाने का सदमा 
नाना पाटेकर के बड़े बेटे का बचपन में ही निधन हो गया था, जिससे वे अंदर तक टूट गए थे। बाद में उनके छोटे बेटे मल्हार पाटेकर के जन्म से उनके जीवन में दोबारा खुशियां आईं। मल्हार ने अभिनय के बजाय फिल्म निर्माण और निर्देशन के क्षेत्र को चुना है।

कारगिल युद्ध के दौरान करीब 60 दिन सेना के साथ रहे
नाना ने बताया थी कि 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से अनुमति लेकर सेना के जवानों के साथ करीब 60 दिन बिताए थे। उनके मुताबिक, वे एक त्वरित प्रतिक्रिया दल के साथ भी रहे थे। उन्होंने ऑपरेशनल जानकारी साझा करने से इनकार किया।

पिता के इलाज के पैसे जुटाने के लिए नाटक करते रहे
नाना ने एक भावुक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता अस्पताल में भर्ती थे और उनके पास इलाज के पैसे नहीं थे। पिता की दवाइयों के लिए वे नाटक करते रहे। उन्होंने उस दौर को याद करते हुए कहा कि एक तरफ पिता की हालत थी और दूसरी तरफ उन्हें मंच पर जाना पड़ता थाखेत में किसान की तरह काम करना और खाना बनाना था पसंद
फिल्मों से दूर समय में नाना पुणे के पास अपने फार्महाउस पर खेती करते रहे थे। उन्होंने बताया था कि उनके पास करीब 10 एकड़ जमीन है, जहां वे खुद खेत जोतते और भैंसों की देखभाल करते थे। खाना बनाना भी उन्हें बेहद पसंद था और मजाक में उन्होंने कहा था कि उन्हें लगता है कि वे अभिनेता से बेहतर कुक हैं।

‘परिंदा’ की शूटिंग में सचमुच जल गए थे नाना
‘परिंदा’ के क्लाइमैक्स में आग वाला सीन असली आग के साथ शूट किया गया था। नाना के मुताबिक, वे वास्तव में आग की चपेट में आ गए और उनकी त्वचा, दाढ़ी, मूंछ, भौंह और पलकों तक जल गईं। उन्होंने बताया कि उन्हें करीब 60 दिन अस्पताल में रहना पड़ा और लगभग छह महीने आराम करना पड़ा था।

 

 

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