दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने पराली जलाने के साथ वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी चिंता जताई। साथ ही अमीर वर्ग की गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण पर भी सवाल उठाए।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान मामले में सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस दौरान पराली जलाने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण और किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर चर्चा की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल रहे।
अपराजिता सिंह ने बताया कि दिल्ली में बारिश होने के कारण प्रदूषण के स्तर में कुछ गिरावट आई है। उन्होंने 5 नवंबर के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उस दिन प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 14 प्रतिशत था।
किसानों को मशीन देने भर से नहीं रुकेगी पराली जलाने की समस्या
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह वह समय है जब किसान अगली फसल की बुवाई करते हैं। ऐसे में पराली जलाने की समस्या रुक जानी चाहिए। इस पर अपराजिता सिंह ने कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनें उपलब्ध कराने भर से समस्या हल नहीं होगी। कई किसानों के पास मशीन चलाने के लिए ईंधन खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। इसके अलावा छोटे खेतों में इन मशीनों का इस्तेमाल करना भी मुश्किल होता है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने इस दौरान कहा कि अधिकारियों की ओर से एक निश्चित दर पर पराली खरीदने का प्रस्ताव भी दिया गया था।
