भारत: ऑनलाइन शॉपिंग के दौर में किराना दुकानों पर भरोसा कायम, दूध-सब्जी के लिए बाजार पहुंच रहे भारतीय परिवार

ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने के बावजूद भारतीय परिवार दूध, फल और सब्जियों जैसी रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं के लिए स्थानीय किराना दुकानों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य बजट तय करने में पोषण, बुजुर्गों और बच्चों की पसंद अहम हो रही है।

ऑनलाइन खरीदारी के दौर में भारतीय परिवार दूध, फल सब्जी के लिए किराना की दुकानों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। अब खानपान संबंधी फैसलों में केवल आमदनी व परंपरागत पसंद नहीं पोषण व परिवार के सदस्यों की जरूरतें भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

महंगी वस्तुओं की खरीदारी के लिए दुकानों को तरजीह
देखकर या परखकर लेने वाली महंगी वस्तुओं के लिए ऑनलाइन के बजाए लोग अब भी दुकानों पर ही जाते हैं। खास बात यह कि परिवार में बुजुर्गों और छोटे बच्चों की पंसद भी खाद्य बजट तय करने में अहम हो रही है। एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के हवाले से यह तथ्य उजागर हुए हैं। भारतीय परिवारों के कुल उपभोग खर्च में अब खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 33 फीसदी व गैर-खाद्य वस्तुओं और सेवाओं पर लगभग 67 फीसदी प्रतिशत खर्च हो रहा है।
ऑनलाइन खरीदारी में कपड़े-जूते आगे, रोजमर्रा का सामान पीछे
ऑनलाइन खरीदारी में कपड़ों की हिस्सेदारी 19.97 और जूतों की 12.05 फीसदी रही। वहीं सब्जियों की खरीदारी महज 1.32, ताजे फलों की एक, सूखे मेवों की 0.62 और अंडे, मछली व मांस की 0.59 फीसदी रही। फर्नीचर की ऑनलाइन खरीदारी 0.18, चिकित्सा उपकरणों की 0.32 और मनोरंजन से जुड़ी वस्तुओं की 0.52 फीसदी दर्ज की गई।

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