रानीपोखरी में विधि विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ, क्षेत्रीय जनता में खुशी की लहर

विधायक बृजभूषण गैरोला के प्रयासों को मिली सफलता, सरकार के सकारात्मक जवाब से जगी उम्मीदें; विधि विशेषज्ञ एस.एन. उपाध्याय ने निर्णय को बताया उत्तराखंड के युवाओं के लिए स्वर्णिम युग की शुरुआत

देहरादून। उत्तराखंड के युवाओं, विशेषकर कानून की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। देहरादून जनपद के रानीपोखरी क्षेत्र में प्रस्तावित विधि विश्वविद्यालय (लॉ यूनिवर्सिटी) की स्थापना का रास्ता अब साफ होता नजर आ रहा है। उत्तराखंड विधानसभा के गैरसैंण सत्र के दौरान नियम-300 के अंतर्गत उठाए गए सवाल के जवाब में सरकार ने इस परियोजना को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। सरकार के इस जवाब के बाद रानीपोखरी सहित आसपास के क्षेत्रों में खुशी और उम्मीद का माहौल है।

इस महत्वपूर्ण विषय को डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला ने विधानसभा में उठाया था। उन्होंने रानीपोखरी में विधि विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़ी लंबित प्रक्रिया और स्थानीय ग्रामीणों की मांग को सरकार के समक्ष प्रमुखता से रखा। गौरतलब है कि रानीपोखरी क्षेत्र के ग्रामीण पिछले करीब नौ महीनों से विधि विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना की घोषणा और शिलान्यास के बावजूद अब तक निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया था, जिससे क्षेत्र में निराशा बनी हुई थी।

विधायक द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि विधि विश्वविद्यालय भवन निर्माण से संबंधित प्रकरण पर मंत्रिमंडल की बैठक में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में सभी संबंधित विभागों के साथ बैठक आयोजित कर परीक्षण करने के लिए मुख्य सचिव को अधिकृत किया गया है। बैठक के निर्णय के बाद संबंधित प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार के इस सकारात्मक जवाब को विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विधायक के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद क्षेत्र में खुशी की लहर

विधायक बृजभूषण गैरोला द्वारा विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने और सरकार के सकारात्मक जवाब की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किए जाने के बाद क्षेत्रीय जनता में उत्साह देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों और युवाओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि अब विश्वविद्यालय निर्माण की प्रक्रिया जल्द धरातल पर उतरेगी। ग्रामीणों का मानना है कि विधि विश्वविद्यालय की स्थापना से न केवल रानीपोखरी बल्कि संपूर्ण डोईवाला क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी।

एस.एन. उपाध्याय ने निर्णय को बताया स्वर्णिम युग की शुरुआत

इस निर्णय का स्वागत करते हुए विधि विशेषज्ञ एस.एन. उपाध्याय ने कहा कि रानीपोखरी में विधि विश्वविद्यालय की स्थापना उत्तराखंड के शैक्षणिक और विधिक क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक विश्वविद्यालय के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के युवाओं के लिए उच्चस्तरीय कानूनी शिक्षा, शोध और रोजगार के नए अवसरों के द्वार खोलेगा।

उन्होंने कहा, “रानीपोखरी में विधि विश्वविद्यालय की स्थापना उत्तराखंड के लॉ एस्पिरेंट्स और क्षेत्रीय जनता के लिए स्वर्णिम युग की शुरुआत साबित हो सकती है। इससे राज्य के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विधिक शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही, न्यायिक सेवाओं, वकालत, कानूनी शोध और अन्य विधिक क्षेत्रों में करियर बनाने वाले युवाओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होगा।”

उपाध्याय ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास में शिक्षा और न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विधि विश्वविद्यालय की स्थापना से उत्तराखंड में विधिक जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा तथा भविष्य में राज्य राष्ट्रीय स्तर पर विधिक शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।

क्षेत्र के विकास को भी मिलेगी नई गति

स्थानीय स्तर पर विश्वविद्यालय की स्थापना से शिक्षा के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति मिलने की संभावना है। विश्वविद्यालय बनने से विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे स्थानीय व्यापार, आवास, परिवहन, रोजगार और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है।

उल्लेखनीय है कि रानीपोखरी के लिस्त्राबाद गांव में विधि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शिलान्यास किया था। हालांकि, इसके बाद परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई और मामला लंबे समय तक लंबित रहा।

अब विधानसभा में सरकार के सकारात्मक जवाब और विधायक की पहल से एक बार फिर इस परियोजना को लेकर उम्मीदें मजबूत हुई हैं। क्षेत्रीय जनता को आशा है कि सरकार जल्द ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर निर्माण कार्य शुरू करवाएगी।

फिलहाल सभी की निगाहें मंत्रिमंडल के आगामी निर्णय और परियोजना की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं। यदि यह योजना जल्द धरातल पर उतरती है, तो रानीपोखरी न केवल उत्तराखंड के शैक्षणिक मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाएगा, बल्कि राज्य के युवाओं के लिए विधिक शिक्षा और करियर के नए अवसरों का महत्वपूर्ण केंद्र भी बन सकता है।

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