सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि शैक्षणिक संस्थानों और कार्यस्थलों पर भी महिलाओं को पीरियड्स के कारण शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज की सोच को दर्शाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में तीन महिला सफाई कर्मचारियों से पीरियड्स साबित करने के लिए सैनिटरी पैड की तस्वीरें भेजने वाली घटना पर ऐक्शन लिया है। कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में दिशानिर्देश बनाने का फैसला किया है, ताकि महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य, गरिमा, शारीरिक स्वायत्तता और गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन न हो, जब वे मासिक धर्म से गुजर रही हों।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की बेंच ने शैक्षणिक संस्थानों और कार्यस्थलों पर ‘पीरियड-शेमिंग’ की घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि ऐसी घटनाएं लोगों की मानसिकता को दर्शाती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें पूरे भारत में लागू होने वाले दिशानिर्देशों की तत्काल आवश्यकता बताई गई है।
SCBA ने कोर्ट को बताया कि ‘पीरियड-शेमिंग’ की कई घटनाएं हुई हैं और कोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। SCBA के अध्यक्ष विकास सिंह और अन्य पदाधिकारियों अपर्णा भट्ट और प्रज्ञा बघेल ने कोर्ट को बताया कि महिलाओं की गरिमा और स्वास्थ्य के अधिकार को बनाए रखने के लिए पूरे भारत में लागू होने वाले दिशानिर्देशों की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा की घटना कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि देश भर में ऐसी कई घटनाओं की रिपोर्ट आई हैं।
अनुच्छेद 21 का उल्लंघन
SCBA ने अपनी याचिका में कहा है कि ‘कई संस्थानों में महिलाओं और लड़कियों को मासिक धर्म हो रहा है या नहीं, यह जांचने के लिए आक्रामक और अपमानजनक जांचों से गुजरना पड़ता है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके जीवन, गरिमा, गोपनीयता और शारीरिक अखंडता के अधिकार का घोर उल्लंघन है।’
हरियाणा सरकार की जांच शुरू
इस मामले में हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया कि घटना की जांच शुरू कर दी गई है और घटना के लिए जिम्मेदार दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है कि कार्यस्थलों और शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं के मासिक धर्म से संबंधित मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता और उचित नीतियों की कितनी आवश्यकता है। कोर्ट के इस कदम से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह सुनिश्चित करेगा कि महिलाओं को उनके मासिक धर्म के दौरान गरिमा और सम्मान मिले। यह कदम महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों के प्रति एक महत्वपूर्ण प्रगति है।
