आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना व अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत उपचारित होने वाले मरीजों से डिस्चार्ज के समय फीडबैक फार्म भराया जाता है, जिसमें मरीज से उपचार अवधि की सारी जानकारियां व फीडबैक ली जाती है। यह फार्म संबंधित अस्पतालों को बिल के साथ अनिवार्य रूप से जमा करना होता है।
प्रदेश के कर्मचारियों व पेंशनरों के कैशलेस इलाज के लिए संचालित राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (गोल्डन कार्ड) में अस्पतालों को चिकित्सा दावों में अनिवार्य रूप से मरीज से डिस्चार्ज होने पर फीडबैक लेना होगा। इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को दिशानिर्देश जारी किए।
अब अस्पतालों को अपने चिकित्सा दावों के साथ लाभार्थी का हस्ताक्षर युक्त फीडबैक फार्म भी जमा कराना होगा, जिसे दावे के साथ जमा न किए जाने की दशा में चिकित्सालय को भुगतान नहीं किया जाएगा। प्राधिकरण के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में चेयरमैन ने निर्देश दिए गए कि दावों के परीक्षण के दौरान उक्त अनिवार्य फीडबैक फार्म की उपलब्धता होने पर ही दावों पर विचार किया जाए। उपचारित लाभार्थी को रेंडम आधार पर फोन कर उपचार संबंधी फीडबैक फार्म की जानकारियों की पुष्टि भी जाएगी।
राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत राजकीय व स्वायतशासी कार्मिकों व पेंशनर्स को अंशदान व्यवस्था के आधार पर सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। प्रदेश में करीब 5.16 लाख एसजीएचएस कार्ड धारक हैं। 1.73 लाख मरीजों ने अस्पतालों में भर्ती होकर योजना की कैशलेस उपचार सुविधा का लाभ उठाया है। योजना के आरंभ से अब तक इस असीमित कैशलेस उपचार सुविधा पर 641 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च हुई है। वहीं ओपीडी में 1.83 लाख दावों के सापेक्ष 300 करोड़ का खर्च हुआ है।
