हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 में पहली बार होंगे चार अमृत स्नान, मकर संक्रांति से हो जाएगी मेले की शुरुआत

उत्तराखंड में अर्धकुंभ मेले को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 2027 में होने वाले अर्धकुंभ मेले के लिए दस स्नान पर्व की तिथियां भी घोषित की गयी हैं। इस बार अर्धकुंभ में पहली बार चार अमृत स्नान होने जा रहे हैं।

उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में 2027 में होने वाला अर्धकुंभ 3 महीने तक चलेगा। अर्धकुंभ में पहली बार चार अमृत स्नान होने जा रहे हैं, जिनकी तिथियां घोषित कर दी गई हैं।

उत्तराखंड में अर्धकुंभ के लिए लंबे समय से तैयारी चल रही है। इसी श्रृंखला में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को डामकोठी में 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान बैठक में मौजूद संतों ने कुंभ की तैयारी को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की सराहना भी की।

इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अर्धकुंभ के आयोजन में संतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सभी संतों के सुझावों पर गंभीरता से विचार कर कुंभ मेले की व्यवस्थाओं को भव्य और व्यवस्थित बनाया जाएगा। सीएम धामी ने कहा कि कुंभ मेला भव्य, दिव्य और शानदार होगा। इसके लिए प्रशासनिक तैयारी भी तेज गति से चल रही हैं।

13 जनवरी मकर संक्रांति से मेले की शुरुआत होगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि 13 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति के दिन से मेले की शुरुआत हो जाएगी। बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने हरिद्वार में 2027 अर्धकुंभ मेले के लिए 10 प्रमुख स्नान की तिथियां घोषित की। जनवरी माह से अप्रैल तक चलने वाले इस महापर्व के लिए पहली बार साधु-संतों के साथ चार अमृत स्नान निर्धारित किए गए हैं।

6 मार्च को महाशिवरात्रि पर पहला अमृत स्नान

इन चार अमृत स्नानों में 6 मार्च 2027 को महाशिवरात्रि के दिन पहला अमृत स्नान होगा। 8 मार्च 2027 को सोमवती/फाल्गुनी अमावस्या के दिन दूसरा स्नान होगा। इसके बाद 14 अप्रैल 2027 को वैसाखी के अवसर पर तीसरा अमृत स्नान आयोजित किया जाएगा, जबकि 20 अप्रैल चैत्र पूर्णिमा के दिन चौथा अमृत स्नान संपन्न होगा।

6 फरवरी को मौनी अमावस्या

इनके अलावा प्रमुख पर्व की स्नान तिथियां भी घोषित की गई हैं। जिसके तहत 14 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति, 6 फरवरी 2027 को मौनी अमावस्या, 11 फरवरी 2027 को बसंत पंचमी और 20 फरवरी 2027 के दिन माघ पूर्णिमा के अवसर पर प्रमुख पर स्नान होंगे।

नवसंवत्सर को भी स्नान होगा

वहीं, विशेष धार्मिक अवसर पर भी दो स्नान घोषित किए गए हैं, जिनमें 7 अप्रैल को नवसंवत्सर और 15 अप्रैल को रामनवमी के अवसर पर स्नान पर होंगे। इन सभी तिथियों को लेकर संत समुदाय और अखाड़ों ने भी अपनी सहमति देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की है।

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