महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर देश के शीर्ष नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की
महान समाज सुधारक ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर देश के शीर्ष नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी प्रेरणा स्थल पहुंचकर महात्मा फुले को पुष्प अर्पित किए और उन्हें नमन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महात्मा फुले को पुष्पांजलि अर्पित की और उनके समाज सुधार के योगदान को याद किया।
पीएम मोदी ने बताया- फुले आज भी प्रेरणा स्रोत
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि महात्मा फुले केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी भारत के भविष्य के मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि फुले ने अपना जीवन समानता, न्याय और शिक्षा के लिए समर्पित किया और महिलाओं व वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष की मजबूत नींव रखी। प्रधानमंत्री ने यह भी जोर दिया कि उनके विचार आज के भारत में ‘सबका साथ, सबका विकास’ जैसे संकल्पों में स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
पीएम मोदी और राहुल गांधी के बीच हुई बातचीत
संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच संक्षिप्त बातचीत भी हुई। दोनों नेताओं ने इस मौके पर आपसी शिष्टाचार के साथ अभिवादन किया।
कई दिग्गज नेता रहे मौजूद
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित कई नेता मौजूद रहे। सभी ने प्रेरणा स्थल पर एकत्र होकर महात्मा फुले के विचारों और उनके सामाजिक योगदान को स्मरण किया। संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में नेताओं ने महात्मा फुले के आदर्शों (समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय) को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
ओम बिरला ने महात्मा फुले को क्रांतिसूर्य बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली माध्यम बनाया। वहीं अमित शाह ने कहा कि फुले ने महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक समानता के लिए अभूतपूर्व कार्य किए और सत्यशोधक समाज की स्थापना कर नई सोच को जन्म दिया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियों में भी महात्मा फुले के विचारों की झलक दिखाई देती है।
वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी फुले को याद करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प दोहराया। सीएम योगी ने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ता है जब हर व्यक्ति को शिक्षा और सम्मान का अधिकार मिलता है।
200वीं जयंती पर पीएम मोदी ने लिखा लेख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के महान समाज सुधारकों में से एक और पीढ़ियों को दिशा दिखाने वाले महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने कहा कि ज्योतिराव फुले ने अपना पूरा जीवन समानता, न्याय और शिक्षा के मूल्यों के प्रति समर्पित कर दिया। वे ही थे जिन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष की शुरुआत की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक लेख में अपने विचार साझा किए।
आज 11 अप्रैल हम सभी के लिए बहुत विशेष दिन है। आज भारत के महान समाज सुधारकों में से एक और पीढ़ियों को दिशा दिखाने वाले महात्मा ज्योतिराव फुले की जन्म-जयंती है। इस वर्ष यह अवसर और भी अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके 200वें जयंती वर्ष का शुभारंभ भी हो रहा है।
महान समाज सुधारक महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, आत्म चिंतन और समाज के हित के लिए अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। महात्मा फुले को केवल उनकी संस्थाओं या आंदोलनों के लिए ही याद नहीं किया जाता, बल्कि उन्होंने लोगों के मन में जो आशा और आत्मविश्वास जगाया, उसका व्यापक प्रभाव हम आज भी महसूस करते हैं। उनके विचार देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज हैं।
महात्मा फुले का जन्म 1827 में महाराष्ट्र में बहुत साधारण परिवार में हुआ। चुनौतियां कभी उनकी शिक्षा, साहस और समाज के प्रति समर्पण को नहीं रोक पाईं। उन्होंने हमेशा माना कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, इंसान को मेहनत करनी चाहिए, ज्ञान हासिल करना चाहिए और समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि अनदेखा करना चाहिए। बचपन से ही महात्मा फुले बहुत जिज्ञासु थे। वो कहते भी थे, “हम जितना ज्यादा सवाल करते हैं, उनसे उतना ही अधिक ज्ञान निकलता है।”
शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण मिशन
महात्मा फुले के जीवन में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण मिशन बनी। उनका मानना था, ज्ञान किसी एक वर्ग की संपत्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति है, जिसे सभी के साथ साझा किया जाए। जब समाज के बड़े हिस्से को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, तब उन्होंने लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए स्कूल खोले। वे कहते थे, “बच्चों में जो सुधार मां लाती है, वह बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए सबसे पहले लड़कियों के लिए स्कूल खोले जाएं।” उन्होंने शिक्षा को न्याय व समानता का माध्यम बनाया। शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण हमें आज भी प्रेरित करता है।
कृषि व ग्रामीण विकास की गहन जानकारी
महात्मा फुले ने कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की गहरी जानकारी हासिल की। वे कहते थे कि किसानों और मजदूरों के साथ अन्याय समाज को कमजोर करता है। उन्होंने गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों को सम्मान दिलाने के लिए जीवन समर्पित कर दिया।
समाज के सभी लोगों को मिलें समान अधिकार
महात्मा फुले ने कहा था, जोपर्यंत समाजातील सर्वांना समान अधिकार मिलत नाहीत, तोपर्यंत खरे स्वातंत्र्य मिलत नाही” यानी जब तक समाज के सभी लोगों को समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्ची आजादी नहीं मिल सकती। इसी विचार से उन्होंने कई संस्थाओं की स्थापना की। उनका सत्यशोधक समाज, आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण समाज सुधार आंदोलनों में से एक था। यह आंदोलन महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों की पुरजोर आवाज बना।
सावित्रीबाई फुले के बिना स्मरण अधूरा
महात्मा फुले का स्मरण, सावित्रीबाई फुले के उल्लेख के बिना अधूरा है। वह स्वयं महान समाज सुधारक थीं। भारत की पहली महिला शिक्षिकाओं में शामिल सावित्रीबाई ने लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में बेहद अहम भूमिका निभाई। महात्मा फुले के निधन के बाद भी उन्होंने इस कार्य को जारी रखा।
शिक्षा के प्रति संकल्प को मजबूत करना होगा
महात्मा फुले के विचारों को अपनाकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। हमें शिक्षा के प्रति अपने संकल्प को मजबूत करना होगा। अन्याय के प्रति संवेदनशील बनना होगा और यह विश्वास रखना होगा कि समाज अपने प्रयासों से ही खुद को बेहतर बना सकता है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज की शक्ति को जनहित और नैतिक मूल्यों से जोड़कर भारत में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं। यही कारण है कि आज भी उनके विचार करोड़ों लोगों में नई उम्मीद जगाते हैं। महात्मा फुले 200 साल बाद भी केवल इतिहास का नाम नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के मार्गदर्शक बने हुए हैं।
