सूचना के अधिकार के अंतर्गत एक अधिकारी की संपत्तियों की जानकारी मांगी थी। इसके उत्तर में लोक सूचना अधिकारी ने बताया कि मांगी गई सूचना अधिकारी के जीवन और सुरक्षा से संबंधित है, इसलिए उसे उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।
लोक अधिकारियों की संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करने से उनके परिवारजनों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है और इस कारण इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। राज्य सूचना आयोग ने एक मामले की सुनवाई के दौरान सिंचाई विभाग के सूचना अधिकारी के इस तर्क को सही पाया है।
आयोग ने पीएमजीएसवाई, सिंचाई खंड के सूचना अधिकारी के इस तर्क को भी स्वीकार किया है कि किसी अधिकारी की संपत्तियों की जानकारी उसकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) का हिस्सा होती है, जिसे केवल निर्धारित विभागीय उच्च अधिकारियों के द्वारा ही देखा जा सकता है।
सूचना आयोग ने सूचना अधिकारी के इस तर्क को तब स्वीकार किया है जब इसी मामले की सुनवाई के दौरान उसने पाया कि राज्य शासनादेश के कारण लोक अधिकारियों के द्वारा अपनी संपत्तियों की जानकारी स्व प्रकटन के रूप में विभाग की वेबसाइट पर दर्ज कराना अनिवार्य है।
