जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में मंगलवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक ‘मंगल मिलन’ हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री समेत नेता पहुंचे इसमें पहली बार एनसीपीआई को भी आमंत्रित किया गया था।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) संसदीय दल की बैठक ‘मंगल मिलन’ मंगलवार को संसद पुस्तकालय भवन (पीएलबी) में शुरू हुई। यह बैठक लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किए जाने के एक दिन बाद हुई।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए?
पहली बार तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए और अब एनसीपीआई सांसद बन चुके नेता इस बैठक में चर्चा में शामिल हुए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के साथ अन्य एनडीए सांसद बैठक में शामिल होने के लिए जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम पहुंचे। पहले तृणमूल कांग्रेस के साथ रहे एनसीपीआई सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायोनी घोष भी इस बैठक में शामिल हुए।
किस मुद्दे पर हो रही है चर्चा?
एनडीए नेताओं की यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई, जब केंद्र सरकार नकल विरोधी विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। वहीं, विपक्ष जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित ‘पुलिस की ज्यादती’ के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
यह विधेयक सोमवार को केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेश किया था। इस दौरान विपक्ष लगातार जोरदार नारेबाजी कर रहा था। इस विधेयक के जरिये सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन किया जाएगा।
प्रस्तावित संशोधन का मकसद सख्त कानूनी प्रावधानों के जरिये परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ाना है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसके प्रमुख प्रावधानों में कड़ी सजा शामिल है, जिसमें 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, दोषी पाए जाने वालों की संपत्ति जब्त करना और यह सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्था बनाना शामिल है कि फैसले तीन महीने के भीतर दिए जाएं।
‘मंगल मिलन’ बैठक का मकसद क्या है?
‘मंगल मिलन’ बैठक वास्तव में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीति बैठक का बदला हुआ नाम है। इसका मकसद रचनात्मक चर्चा को बढ़ावा देना और गठबंधन के सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना है।
यह बैठक एनडीए सांसदों की बहस में भागीदारी बढ़ाने और प्रमुख सहयोगी दलों के नेताओं को बोलने का समय और जिम्मेदारी तय करने में मदद करती है। इसमें शिवसेना, एलजेपी, टीडीपी, जेडीयू और अन्य क्षेत्रीय दलों के सहयोगी नेता शामिल होते हैं।
