देहरादून: प्रमाणपत्र फर्जीवाड़े मामला, पहली बड़ी कार्रवाई, दो लेखपाल निलंबित, सत्यापन में लापरवाही आई सामने

प्रमाणपत्रों से जुड़े फर्जीवाड़े की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी भी तय होने लगी है। जांच में आवेदन प्रक्रिया के सत्यापन को लेकर बरती गई लापरवाही सामने आने के बाद तहसील सदर के दो लेखपालों पर कार्रवाई की गई है।

प्रमाणपत्र फर्जीवाड़े में प्रशासन ने बुधवार को पहली कार्रवाई की है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर दो लेखपालों जगदीश राठौर और डिंपल को निलंबित कर दिया गया है। दोनों लेखपालों की प्रथम दृष्टया प्रमाणपत्रों के आवेदन के सत्यापन में लापरवाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में कई और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।

पिछले दिनों फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दो थानों में प्राथमिकी दर्ज की थी। इस प्रकरण में अब तक दो आरोपियों जिनमें छात्रा का पिता और दूसरा मेरठ का दलाल रूपेश पंडित शामिल है को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी ने प्रशासन स्तर पर सीडीओ के नेतृत्व में एक संयुक्त समिति का गठन किया गया था।
यह समिति भी प्र
माणपत्र प्रक्रिया में लापरवाही आदि की जांच कर रही है। इसी क्रम में जिला प्रशासन ने तहसील सदर के दो लेखपालों को निलंबित कर दिया है। इनमें लेखपाल जगदीश राठौर और महिला लेखपाल डिंपल शामिल हैं। बताया जा रहा है कि छात्राओं के प्रमाणपत्रों के दस्तावेज सत्यापन की इन्हीं लेखपालों पर जिम्मेदारी थी।
लेखपालों ने सत्यापन में लापरवाही बरती जिसके कारण ये प्रमाणपत्र तय समय पर निर्गत कर दिए गए। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि इस मामले में गंभीरता से जांच की जा रही है। प्रथमदृष्टया जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रमाणपत्रों की जांच का दायरा बढ़ भी सकता है। जो दस्तावेज भी जांच के लिए आ रहे हैं उनकी प्रशासन स्तर पर बारीकी से जांच की जा रही है। छात्रों के अधिकार पर इस तरह से जालसाजों के कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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